उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा
यह है परियोजना
परियोजना के प्रथम चरण में तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के 17 प्रस्तावों के काम की मंजूरी मिलने के बाद निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी हैं ताकि शुरु में आने वाली दिक्कतों को दूर किया जा सके। अभी तक इस परियोजना के जारी निर्माण कार्यो पर 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। इस परियोजना के पूरा होने पर चारोधामों की दूरी सुरंगों एवम छोटे रास्तों से 813 किमी से घट कर 389 किमी रह जाएगी। यात्रा के समय मे 30 से 40 प्रतिशत की कमी आएगी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 अगस्त 2016 को इस परियोजना का विधिवत शिलान्यास किया था।
पौराणिक कथानक के अनुसार सूर्यवंशी राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ कराने का फैसला किया। इसमें इनका घोड़ा जहां-जहां गया उनके 60,000 बेटों ने उन जगहों को अपने आधिपत्य में लेता गया। इससे देवताओं के राजा इंद्र चिंतित हो गए। ऐसे में उन्होंने इस घोड़े को पकड़कर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। राजा सगर के बेटों ने मुनिवर का अनादर करते हुए घोड़े को छुड़ा ले गए। इससे कपिल मुनि को काफी दुख पहुंचा। उन्होंने राजा सगर के सभी बेटों को शाप दे दिया जिससे वे राख में तब्दील हो गए। राजा सगर के क्षमा याचना करने पर कपिल मुनि द्रवित हो गए और उन्होंने राजा सगर को कहा कि अगर स्वर्ग में प्रवाहित होने वाली नदी पृथ्वी पर आ जाए और उसके पावन जल का स्पर्श इस राख से हो जाए तो उनका पुत्र जीवित हो जाएगा। लेकिन राजा सगर गंगा को जमीन पर लाने में असफल रहे। बाद में राजा सगर के पुत्र भागीरथ ने गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने में सफलता प्राप्त की। गंगा के तेज प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए भागीरथ ने भगवान शिव से निवेदन किया। फलत: भगवान शिव ने गंगा को अपने जटा में लेकर उसके प्रवाह को नियंत्रित किया। इसके उपरांत गंगा जल के स्पर्श से राजा सगर के पुत्र जीवित हुए।
वर्तमान मंदिर का निर्माण आज से ठीक दो शताब्दी पहले गढ़वाल राजा के द्वारा किया गया था। यह मंदिर शंकुधारी शैली में बना हुआ है। इसकी ऊंचाई लगभग 15 मीटर है। जिसके शिखर पर गुंबज है। इस मंदिर में 15 मूर्तियां हैं। मंदिर के गर्भगृह में विष्णु के साथ नर और नारायण ध्यान की स्थिति में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वैदिक काल में हुआ था जिसका पुनरूद्धार बाद में आदि शंकराचार्य ने 8वीं सदी में किया। इस मंदिर में नर और नारायण के अलावा लक्ष्मी, शिव-पार्वती और गणेश की मूर्तियां भी हैं।